खामोशियॉ

कभी खामोशियॉ भी समझा देती थी

मेरे दिल की बातें तुम्हें

आज अलफा़ज भी कम पड़ते हैं

बात वो पुरानी हुई जब तुम

आंखें भी पढ़ लिया करते थे तुम

ना कहते हुए भी

शब्दों को गढ़ लिया करते थे तुम

मेरी चुप्पी को भी

अपनी सांसो मे बुन लिया करते थे तुम

बातें यह पुरानी हुई

आज की नहीं सदियों

पुरानी सी लगती हैं

अनकहाँ प्यार……

प्यार वो ही नहीं जो कहा जाए
बिन कहे भी बातें हुआ करती है
बिना जले भी कई दिल
दीयों-से “जल” जाते है
बिना मुलाकात के भी
हर रात बात हुआ करती है
जब चाँद भी अपनी चाँदनी में समाया रहता है
तभी तुमसे कई बार
ये आँखे चार हुआ करती है
सर्द हवाओं का काफिला
अपने ज़ोर पर हो
तभी मेरा हाथ
तेरे हाथ को कई बार
सम्भाले रखता है
प्यार वो ही नहीं जो कहा जाए
बिन कहें भी बातें हुआ करती हैं

कविता……..बहुत हुआ………

बहुत हुआ तेरे आगे गिड़गिडा़ना यू
प्यार की खातिर तेरा कुछ भी बोल जाना यू
शब्दों का तेरे तीर सा भेद जाना यू
ना कुछ कहे ही
तेरा मुझसे बहुत दूर चले जाना यू
अब नहीं अब और नहीं
हुआ बहुत तेरा मुझपर
हक़ जताना यू
दुहाईयाँ कई देकर
हर पल मुझे अपनी ही
नज़रों में गिरा जाना यू
बहुत हुआ तेरे आगे गिड़गिडा़ना यू
खुद के स्वाभिमान को कुचलकर
तेरा अभिमान बचाना यू
मेरे हर टूटे सपने पर
तेरा आडम्बर दिखाना यू
बहुत हुआ तेरा मुझे
अपमानित कर जाना यू
बहुत हुआ तेरा मुझपर गिड़गिडा़ना यू